Friday, September 3, 2021

क्यों मनाया जाता है हिन्दी दिवस?

हिन्दी दिवस प्रश्नमंजूषा
यह प्रश्नमंजूषा 'हिन्दी पखवाड़ा' मनाते हुए राजभाषा हिन्दी का प्रचार, प्रसार एवं जागरूकता बढ़ाने हेतु आयोजित की गई है। सभी प्रश्न अनिवार्य है। सभी सहभागियों को ई-प्रशस्ति पत्र से नवाजा जाएगा।

 14 सितंबर 1949 को बनी राष्‍ट्र की आधिकारिक भाषा 6 दिसंबर 1946 को आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा का गठन हुआ। सच्चिदानंद सिन्हा संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष चुना गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी (संविधान का मसौदा तैयार करने वाली कमेटी) के चेयरमैन थे। संविधान में विभिन्न नियम-कानून के अलावा नए राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का मुद्दा भी अहम था। क्‍योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां थीं। काफी विचार-विमर्श के बाद हिन्दी और अंग्रेजी को नए राष्ट्र की आधिकारिक भाषा चुना गया। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया। बाद में जवाहरलाल नेहरू सरकार ने इस ऐतिहासिक दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। पहला आधिकारिक हिन्दी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है। राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिंदी हिंदुस्तान को बांधती है। इसके प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसी कर्तव्य हेतु हम 14 सितंबर के दिन को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाते हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, साक्षर से निरक्षर तक प्रत्येक वर्ग का व्यक्ति हिंदी भाषा को आसानी से बोल-समझ लेता है। यही इस भाषा की पहचान भी है कि इसे बोलने और समझने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती।

हिंदी का प्रचार-प्रसार करना केंद्र सरकार की जिम्‍मेदारी

आजादी की लड़ाई के दौरान ही एक राष्ट्र के लिए एक साझा भाषा की मांग उठती रहती थी। अलग-अलग प्रांतों के नेताओं ने हिन्दी को देश की संपर्क भाषा बनने के काबिल माना। समूचे उत्तर भारत के अलावा पश्चिम भारत के ज्यादातर राज्यों में हिन्दी बोली-समझी जाती थी। मगर दक्षिण भारतीय राज्यों और पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए हिन्दी परायी भाषा थी। इसीलिए आजादी के बाद हिन्दी को देश की राजभाषा घोषित नहीं किया गया। संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत हिन्दी को अभिव्यक्ति के सभी माध्यमों के रूप में विकसित और प्रचारित करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उस समय यह सोच थी कि सरकार हिन्दी का प्रचार-प्रसार करेगी और जब यह पूरे देश में आम सहमति से स्वीकृत हो जाएगी, तब इसे राजभाषा घोषित किया जा सकेगा।

हिंदी दिवस का इतिहास:

1947 में जब हमारे देश को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली, तब उनके सामने भाषा की एक बड़ी चिंता खड़ी हुई। भारत एक विशाल देश है जिसमें विविध संस्कृति है। ऐसी सैकड़ों भाषाएं हैं जो देश में बोली जाती हैं और हजारों से अधिक बोलियां हैं। 6 दिसंबर 1946 को, स्वतंत्र भारत के संविधान को तैयार करने के लिए संविधान सभा को बुलाया गया था। सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था, बाद में उनकी जगह डॉ. राजेंद्र प्रसाद को नियुक्त किया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। विधानसभा ने 26 नवंबर 1949 को अंतिम मसौदा पेश किया। इसलिए, स्वतंत्र भारत ने 26 जनवरी 1950 को पूरी तरह से अपना संविधान प्राप्त किया।

लेकिन फिर भी, संविधान के लिए एक आधिकारिक भाषा चुनने की चिंता अभी भी अनसुलझी थी। एक लंबी बहस और चर्चा के बाद, हिंदी और अंग्रेजी को स्वतंत्र भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में चुना गया। 14 सितंबर 1949 को, संविधान सभा ने देवनागरी लिपि और अंग्रेजी में लिखित हिंदी को एक आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। बाद में, पं. जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन को देश में हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।

हिंदी दिवस का महत्व:

आजादी के कुछ साल बाद, भारत की नव-निर्मित सरकार उस विशाल देश में निवास करने वाले असंख्य भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों को एक साथ मिलाने का प्रयास कर रही थी। पूर्णता के एकीकरण के लिए भारत को एक अद्वितीय राष्ट्रीय स्वाद की आवश्यकता थी। चूंकि देश के पास स्वयं की कोई एक राष्ट्रीय भाषा नहीं थी, इसलिए प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया कि हिंदी वह भाषा हो सकती है जिसकी उन्हें तलाश थी। यह उस समय में आदर्श समाधान साबित हुआ। उस समय, हिंदी उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में बोली जाने वाली भाषा थी।

अंग्रेजी को हटाने के समय हुआ था विरोध

जब अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के तौर पर हटने का वक्त आया, तो देश के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। दक्षिण भारतीय राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए। तमिलनाडु में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे भड़क उठे। उसके बाद केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन करके अंग्रेजी को हिन्दी के साथ भारत की आधिकारिक भाषा बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया। आधिकारिक भाषा के अलावा भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल हैं।

हिंदी जानने और बोलने वाले को बाजार में अनपढ़ या एक गंवार के रूप में या तुच्छ नजरिए से देखा जाता है, यह कतई सही नहीं है। हमें स्वतंत्रता तो मिल गई, लेकिन स्वभाषा नहीं मिल पाई, जिसके बिना स्वतंत्रता अभी भी अधूरी है। अत: देश के हर नागरिक की गरिमा बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि हर हिंदुस्तानी को अपनी भाषा का प्रयोग हर जगह, हर स्तर और हर समय करते रहना होगा। आज हर माता-पिता को चाहिए कि अपने बच्चों को विदेशी भाषा सिखाने पर जितना ज्यादा ध्यान दिया जाता है, उससे अधिक हिंदी की तरफ ध्यान देना होगा।

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